Sunday, May 15, 2011

दूर हो सकती है 28 पैसे में रेलवे की आधी समस्‍याएं, बशर्ते

अर्जुन देशप्रेमी
यदि सरकार या रेलवे के पास इच्‍छा शक्ति हो तो 28 पैसे से भी कम के खर्च पर अनगिनत अरूणिमाओं को बचाया जा सकता है, रेलवे में सुरक्षा को चाक चौबंद किया जा सकता है। इससे रेलवे की आधी समस्‍याएं दूर हो सकती हैं, लोगों का भरोसा रेल वे पर बढ सकता है, सरकार की आये दिन होने वाली किरकिरी कम हो सकती है। जो फायदे इन उपायों से होंगे, उनसे जो लाभ होगा वह इससे कहीं ज्‍यादा की बचत करा देगा। फिर भी जरूरत हो तो सरकार इतने पैसे किराये में भी बढा सकती है। शायद ही किसी को आपतित होगी प्रति टिकट 28 पैसे बढाने में।

ट्रेनों में लोगों के साथ क्‍या क्‍या होता है, यह बताने की बात नहीं रह गई है। लगभग हर वह शख्‍स जिसने कभी ट्रेन में सफर किया है जानता है कि ट्रेनों में क्‍या क्‍या होता है। आज अरुणिमा उर्फ सोनू सिन्‍हा को बदमाशों ने चेन झपटने के लिए ट्रेन से बाहर फेंक दिया तो खबर थोडी बडी बन गई क्‍योंकि वह एक उदीयमान खिलाडी थी। पर न जाने कितनी अरुणिमाएं आये दिन ट्रेनों से फेंकी जाती हैं, छीनाझपटी की शिकार होती हैं, कितनों के साथ बदतमीजी होती है। कितनी ही अपने साथ होने वाली घटनाओं को खून का घूंट पीकर खामोश हो जाती हैं।

खबरों पर नजर रखने वाले आपको सैकडों की संख्‍या में इसकी मिसाल दे सकते हैं। क्‍या क्‍या होता है ट्रेनों में जो खबरें बनती हैं और भुला दी जाती हैं। न सिर्फ हमारे द्वारा बल्कि उस रेलवे और प्रशासन के द्वारा जिनके उपर हमारी सुरक्षित यात्रा की जिम्‍मेदारी होती है।

मसलन

1: किसी तकनीकी कारण से यदि ट्रेन किसी सिगलन पर खडी हो या किसी और वजह से, वहां से भी लोग ट्रेन में चढ लेते हैं। इसमें सबसे बडा खतरा तो आतंकवाद से जूझ रहे इस देश में ऐसे स्‍थानों से आतंकियों के ट्रेनों में घुसने का होता है। यदि किसी दिन ऐसा हो जाये तो संभव है वे डिब्‍बों में बम रख दें, अपहरण कर लें, मुंबई के तर्ज पर फायरिंग कर दें या गोधरा की तर्ज पर यात्रियों को जिंदा जला दें। मुंबई में तो ऐसा हो ही चुका है, समझौता एक्‍सप्रेस की याद भी ताजा है और साबरमती का किस्‍सा भी है। चूंकि ऐसे स्‍थानों पर सुरक्षा तो होती नहीं या होती है तो दो या तीन राइफलधारी होते हैं जो इनका मुकाबला भी नहीं कर सकते। पर इस बारे में कोई सोचता ही नहीं। लोग भगवान भारोसे यात्रा करें, रेलवे या प्रशासन को क्‍या।

2: ट्रेन के भीतर भारी भरकम भीड जिसके कारण लोग ददरवाजों पर लटक कर यात्रा करते हैं, गिरते हैं, मरते हैं या अपाहिज होते हैं या घायल होते हैं।

3: अक्‍सर ऐसा देखा गया है कि जिसको जहां मन करता है, चेन पुल करता है। जैसे ही ट्रेन धीमी होती है, उतर कर दौड लगा देता है। हजारों की संख्‍या में ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों का और रेलवे का भारी भरकम समय और धन इसमें जाया होता है, ट्रेनें इस वजह से घंटों लेट होती हैं।

4: जिसको छोटे से स्‍टेशन पर भी जाना होता है, वह लोकल पैसेंजर के नाम पर न सिर्फ लंबी दूरी के ट्रेनों में सवार होता है, वरन दादागिरी करता है, बदतमीजी करता है, मारपीट करता है, चेन पुल कर कहीं भी उतर जाता है।

5: ट्रेनों में लूटपाट की घटनाएं भी इसी कारण होती हैं। बदमाशों का गिरोह या तो ऐसे स्‍थानों पर चढता है, या उनका कोई साथी किसी स्‍टेशन से ट्रेन में सवार होकर बीच रास्‍तें में चेन खींचकर ट्रेन रुकवा देता है जहां से हथियाबंद बदमाश ट्रेन में सवार होकर लूटपाट करते हैं और अगला स्‍टेशन आये उसके पहले ही से चेन खींचकर उतर जाते हैं।

इस तरह की अनेक और भी बातें हैं जो न सिर्फ आम आदमी को परेशान करती हैं, वरन रेलवे और प्रशासन को भी परेशान करती हैं। पर करता कोई कुछ नहीं है। क्‍यों? क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि उसपर तो इतनी बडी राशि लग जाएगी कि वे इसे जुटा ही नहीं सकते हैं।

पर रेलवे और प्रशासन में इच्‍छाशक्ति हो तो इसे मामूली खर्च पर किया जा सकता है जिससे ये सारी घटनाएं, दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं, कम की जा सकती हैं और यात्रा को सुरक्षित किया जा सकता है।

उपाय क्‍या है?

बहुत ही सरल उपाय है। ट्रेनें चले ही तब सभी दरवाजे बंद हो जायें। ठीक उसी तरह जैसे मेट्रो में होता है। यदि ट्रेन के दरवाजे बंद न हों तो ट्रेन चले ही नहीं या चले तो भी ड्राइवर, गार्ड और डिब्‍बों में सवार टीटी को पता चल जाये कि किस कोच में कौन सा गेट बंद नहीं हुआ है। ऐसे में ड्राइवर हूटर दे और टीटी जाकर उस गेट को बंद करे जिसके बाद ट्रेन चले। इसके बाद ट्रेन के डिब्‍बों के दरवाजे तभी खुलें जब ड्राइवर, गार्ड या टीटी उसे खोलें। और ऐसा स्‍टेशन आने पर ही हो। किसी आकस्मिक स्थि‍ति में इनके द्वारा बीच रास्‍ते में भी ऐसा किया जा सकता है।

तकनीक क्‍या है ?

इसके लिए सामान्‍य रूप से दरवाजों को बंद करने वाले चुंबकीय तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है जिसके माध्‍यम से ड्राइवर एक स्‍वीच ऑन करके ट्रेन के दरवाजों पर लगे यंत्र में विद्युत प्रवाह कर चुंबकीय पट्टी को इस तरह से जोडेगा कि दरवाजे बंद हो जायें। ऐसा करते समय दरवाजे पांच से सात सेकेंड में बंद होंगे जिससे बीच में कोई यात्री फंसेगा नहीं। यदि कोई यात्री बीच में आता भी है तो उसे कोई नुकसान नहीं होता है। ऐसा आपने अपने कार्यालयों में देखा होगा। मेट्रो के दरवाजों के बंद होने में जितना समय लगता है उससे यह समय काफी ज्‍यादा होगा। पूरे यंत्र में चुंबकीय पट्टी के साथ वायर और डोर क्‍लोजर लगेंगे जिनपर बहुत खर्च नहीं आता है। वैसे सरकार या रेलवे चाहे तो दूसरी तकनीक का उपयोग भी कर सकती है जो भारत में आसानी से उपलब्‍ध है। पर उसमें खर्च का मामला आडे आएगा। ऐसे में इसी सामान्‍य तकनीक का उपयोग ही काफी होगा।

लागत और व्‍यावहारिकता

देश में रेलवे रोजाना लगभग 2 करोड लोगों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाती है। लोकल यात्रियों को छोड दें तो लगभग एक करोड लोग रोजाना लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करते हैं। एक डिब्‍बे में औसतन 100 के हिसाब से इसके लिए रेलवे को एक लाख डिब्‍बों में य‍ह सुविधा देनी होगी। इस काम के लिए लागत देखी जाये तो नाममात्र है। ट्रेन के एक कोच में अमूमन चार गेट होते हैं। यानि कुल 4 लाख ददरवाजों पर यह सुविधा देनी होगी। देश में मौजूद तकनीक के हिसाब से एक कोच में चार डिब्‍बों में ऐसा करने के लिए एक मोटे अनुमान के हिसाब से लगभग 10000 रु खर्च करने होंगे हालांकि बडे पैमाने पर ऐसा करने पर यह खर्च 2000 रुपये से भी कम में ऐसा करना संभव है। पर यदि 10000 रुपये भी मान लिया जाये तो रेलवे को पूरी व्‍यवस्‍था पर कुल 500 करोड रुपये खर्च करने होंगे। इसकी लाइफ यदि पांच साल भी मानी जाये तो सालाना खर्च 100 करोड रुपये आता है। यदि सालाना यात्रियों की संख्‍या को देखें तो यह 365 करोड होते हैं यानि प्रति यात्री प्रति वर्ष का खर्च 28 पैसे से भी कम आता है।

अब क्‍या यह माना जा सकता है कि सरकार या रेलवे इतनी बडी सुरक्षा के लिए प्रति खत्री प्रति वर्ष 28 पैसे भी खर्च नहीं कर सकती या इस भार को वहन करने की स्थिति में नहीं है। संभवत: हर कोई मानेगा कि यह संभव है, बहुत आसानी से संभव है। लोकल लंबी दूरी के यात्रियों दोनों को जोडें तो खर्च लगभग 56 पैसा बैठता है।

रही बात व्‍यावहारिकता की, तो यह पूरी तरह से न सिर्फ व्‍यावहारिक है, वरन समय की यही मांग है। ऐसा करने के लिए अलग से स्‍टाफ नियुक्‍त करने की भी आवश्‍यकता नहीं है। मेट्रो की तरह इसे दरवाजे वैसे भी हर एक या दो मिनट पर तो खुलने नहीं हैं। जब स्‍टेशन पर गाडी पहुंचेगी तब ड्राइवर को पता होगा कि उसका प्‍ललेटफार्म किस तरु है। ऐसे में वह उसी तरफ के दरवाजे खोलेगा। बीच में गाडी न रुकने के कारण किसी भी तरह की आतंकी घटना की आशंका कम होगी।

ट्रेनों में आपराधिक वारदातें रुकेंगी। कोई किसी को ट्रेन से नीचे नहीं फेंक सकेगा। किसी के नीचे गिरने की आशंका खत्‍म हो जाएगी। अगर कोई किसी वारदात को अंजाम देता है तो वह चलती ट्रेन या उसकी धीमी रफ्तार का फायदा उठाकर भाग नहीं पाएगा। बेटिकट यात्रा पर प्रभावी लगाम लग सकेगा। रेलवे स्‍टेशनों पर प्रभावी सुरक्षा हो पाएगी। वैसे भी लंबी दूरी की ट्रेनें बडे स्‍टेशनों पर ही रुकती हैं जहां सुरक्षा को चाक चौबंद करना छोटे स्‍टेशनों की तुलना में आसान है। लूटपाट करने वाले या तो चढेंगे नहीं या वारदात करेंगे तो पकडे जाएंगे।

चेन खींचे जाने की स्थिति में भी तभी ददरवाजे खेले जाएंगे जब गार्ड या टीटी उस डिब्‍बे में पहुंचेंगे जिसमें चेन खींची गई होगी। इससे किसी को भागने का मौका नहीं मिलेगा और गलत तरीके से चेन खींचने वालों के कार्रवाई हो सकेगी जिससे गलत तररीके से चेन खींचने पर रोक लग सकेगी।

Thursday, November 19, 2009

जम्मू व कश्मीर : पुलवामा | राजौरी | श्रीनगर | अमरनाथ यात्रा | गुलमर्ग | पहलगाम | जम्मू | डोडा | कारगिल | कुपवाड़ा | लेह |

केरल : कोजीकोड | कोवालम | तिरुवनंतपुरम | अलपुज्जा | कसरगोड | कोल्लम | त्रिसूर | कुमारकोम | कोट्टायम | कोच्चि |

तमिलनाडु : थेनी | महाबलिपुरम | मदुरै | नमक्कल | नीलगिरि | तिरुवरुर | ऊटी | वेल्लोर | विल्लुपुरम | तंजावुर | कोडईकनाल | चैन्नई | कुन्नूर | कन्याकुमारी | कांचीपुरम |

अरूणाचल प्रदेश : पूर्वी कमेंग | पूर्वी सियांग | त्वांग | पापुम पेर | चांगलांग |

पश्चिम बंगाल : हावड़ा | जलपाईगुडी | पुरूलिया | वर्द्धमान | दार्जिलिंग | कलिंगपोंग | कोलकता |

उत्तराखंड : ऋषिकेश | देहरादून | बागेश्रवर | कौसानी | मसूरी-धनौल्टी | हरिद्वार | नैनीताल | औली | कौसानी | आदि कैलाश यात्रा | उत्तरकाशी | चकराता |

हिमाचल प्रदेश : किन्‍नौर | पालमपुर | बिलासपुर | मंडी | नैना देवी | शिमला | चिंतपूर्णी | ऊना | सोलन | चंबा | धर्मशाला | मनाली | लाहौल-स्‍पीति | कांगड़ा | कुल्‍लु | किन्‍नर कैलाश |

उड़ीसा : केन्द्रपाडा | कोणार्क | पुरी | बालेश्‍वर | बौध | ढेंकनाल | नयागढ़ | मयूरभंज | कोरापुट | खोरधा | कंधामल | कालाहांडी | जाजपुर | जगतसिंहपुर | झारसुगुडा | भुवनेश्‍वर | कटक |

कर्नाटक : मैसूर | बगलकोट | बंगलूरू | बेलगाम | बेल्लारी | बीजापुर | बीदर | चमराज नगर | चिकमगलूर | शिमोगा | उदुपी | रायचूर | करकला | कबीनी | दान्डेली | हम्पी | बेलूर और हेलिबिड | बांदीपुर | मदिकेरी | बदामी |

उत्तर प्रदेश : लखनऊ | बलिया | मिर्जापुर | वृंदावन | मथुरा | वाराणसी | उन्नाव | फैजाबाद | फर्रुखाबाद | फतेहपुर | गाजियाबाद | गाजीपुर | मेरठ | गोकुल | इलाहाबाद | झांसी | आगरा |

महाराष्ट्र : बीद | अमरावती | धुले | सतारा | शोलापुर | यवतमाल | वर्धा | रत्‍नागिरी | नासिक | मुम्बई |

हरियाणा : भिवानी | फतेहाबाद | गुडगांव | जीन्द | असम : गुवाहाटी | सोनितपुर |

पंजाब : चंडीगढ़ | गुरदासपुर | जालंधर | फतेहगढ़ साहिब | लुधियाना | अमृतसर | नागालैंड : दीमापुर | वोखा | मणिपुर : पश्‍िचमी इम्फाल |

राजस्थान : टोंक | चुरू | जालौर | बंसवाड़ा | भरतपुर | डूंगरपुर | पाली | सवाई माधोपुर | जयपुर | जोधपुर | जैसलमेर | बीकानेर | उदयपुर | अजमेर | रणकपुर |

छत्तीसगढ़ : दुर्ग | धमतरी | जशपुर | बस्तर | आंध्र प्रदेश : नैल्‍लोर | वारंगल | हैदराबाद | आदिलाबाद |

झारखंड : पलामू | रांची | नेतरहाट | बोकारो | धनबाद | देवघर | अन्य : गोवा | दिल्ली |

मध्य प्रदेश : धार | इंदौर | ओंकारेश्‍वर | पंचमढ़ी | भोपाल | अमरकंटक | उज्‍जैन | मान्डू | कान्हा | ग्वालियर | खजुराहो |

गुजरात : पोरबंदर | राजकोट | सापूतारा | अहमदाबाद | पाटन | इडर | कच्छ - भुज | सूरत |

बिहार : कैमूर | रोहतास | भागलपुर | पटना | बोधगया | बेगुसराय | नवादा | सहरसा | समस्तीपुर | सीतामढ़ी | सि‍वान | बांका | दरभंगा | किशनगंज | जमुई | बक्सर | गोपालगंज | मुजफ्फरपुर | औरंगाबाद | वैशाली | नालन्‍दा |

भारत में देखने लायक स्‍थानों का विवरण


हिमाचल प्रदेश : किन्‍नौर | पालमपुर | बिलासपुर | मंडी | हमीरपुर | चंमुडा देवीमंदिर | डलहौजी | नैना देवी मंदिर | शिमला | चिंतपुर्णी | ऊना | सोलन | चंबा | धर्मशाला | मनाली | थानेदर | ताबो-लाहौल स्‍फीति |

उड़ीसा : केन्द्रपाडा | कोणार्क | पुरी | बालेश्‍वर | बाड़गढ़ | भाद्रक | बौध | देवगढ़ | ढेंकनाल | नयागढ़ | नौपाडा | मयूरभंज | मलकनगिरी | कोरापुट | खोरधा | केंदुझार | कंधामल | कालाहांडी | जाजपुर | जगतसिंहपुर | झारसुगुडा | भुवनेश्‍वर | कटक |

कर्नाटक : मंगलौर | मैसूर | बगलकोट | बंगलूरू | बेलगाम | बेल्लारी | बीजापुर | बीदर | चमराज नगर | चिकमगलूर | शिमोगा | उदुपी | रायचूर | करकला | कबीनी | दान्डेली | हम्पी | बिलगिरी रंगन हिल्‍स | बेलूर और हेलिबिड | बांदीपुर | मदिकेरी | बदामी |

उत्तर प्रदेश : मुरादाबाद | मुजफ्फरगर | प्रतापगढ़ | मिर्जापुर | रायबरेली | रामपुर | सहारनपुर | संत कबर नगर | संत रविदास नगर | शाहजहांपुर | सीतापुर | सांनभद्र | श्रावस्‍ती | सुलतानपुर | वृंदावन | कालिंजर | मथुरा | बागपत | बहराइच | बांदा | चंदौली | इटावा | जालौन | पीलीभीत | देवगढ़ | गोंडा | मुरैना | जौनपुर | सारनाथ | बिठुर | उन्‍नाव | देवरिया | फैजाबाद | फर्रूखाबाद | फतेहपुर | फिरोजाबाद | गाजियाबाद | गाजीपुर | गोरखपुर | हमीरपुर | हरदोई | हाथरस | ज्‍योति बा फुले नगर | कानपुर | कौशाम्‍बी | कुशीनगर | लखीमपुर खीरी | ललितपुर | महराजगंज | महोबा | मैनपुरी | मऊ | मेरठ | बरसाना | बस्‍ती | बरेली | बुलंदशहर | बाराबंकी | बलरामपुर | आजमगढ़ | गोवर्धन | गोकुल | अंबेडकर नगर | अलीगढ़ | प्रतापगढ़ | अयोध्‍या | इलाहाबाद | झांसी | चित्रकुट | आगरा | वाराणसी |

महाराष्ट्र : बीड | अहमदनगर | अकोला | अमरावती | बुलढाना | चंद्रपुर | धुले | गोंडिया | जलगांव | जालना | उस्‍मानाबाद | परभणी | सांगली | सतारा | सिंधुदुर्ग | शोलापुर | ठाणे | भंडारा | यवतमान | वर्धा | हिंगोली | चिपलुन | रत्‍नागिरी | रायगढ़ | कोल्‍हापुर | कोंडाना की गुफाएं | लोनावाला | मुरूड जंजीरा | शिरडी | नासिक | पुणे | मुंबई |

बिहार : पश्चिम चंपारण-बेतिया | पावापुरी | नवादा | पूर्णिया | रोहतास | सहरसा | समस्‍तीपुर | सीतामढ़ी | सिवान | सोनपुर | गया | बांका | दरभंगा | किशनगंज | मोतिहारी | जमुई | कैमुर | मधेपुरा | शिवहर | मुंगेर | भोजपुर | बक्‍सर | गोपालगंज | खगडि़या | कटिहार | भागलपुर | पटना | मुजफ्फरपुर | मधुबनी | सारण | औरंगाबाद | बेगुसराय | वैशाली | बोधगया | नालन्‍दा | राजगीर | पूर्वी चंपारण-मोतीहारी | अररिया | ककोलत | भीमबांध अभ्‍यारण्‍य |

मध्‍यप्रदेश : धार | मांडला | सागर | बालाघाट | बरवानी | बेतूल | भिंड | छिंदवाड़ा | दमोह | सिवनी | देवास | गुना | हरदा | झबुआ | कटनी | खंडवा | खरगौन | नीमच | रायसेन | राजगढ़ | रतलाम | सतना | सीहोर | शहडोल | शाजापुर | श्योपुर | सीधी | टीकमगढ़ | उमरिया | विदिशा | चन्देरी | नरसिंहपुर | इंदौर | ओंकारेश्‍वर | दिन्डोरी | दमोह | दतिया | शिवपुरी | पंचमढ़ी | भोपाल | रीवा | अमरकंटक | उज्‍जैन | ओरछा | पन्ना | मान्डू | कान्हा | ग्वालियर | खजुराहो | बांधवगढ़ |

जम्मू व कश्मीर : पुलवामा | राजौरी | श्रीनगर | उधमपुर | अमरनाथ यात्रा -1 | अमरनाथ यात्रा -2 | अमरनाथ यात्रा -3 | अमरनाथ यात्रा -4 | गुलमर्ग | पहलगाम | जम्मू | अनंतनाग | बारामूला | डोडा | कारगिल | कठुआ | कुपवाड़ा | पुंछ | खिवखोड़ी | लेह |

उत्तराखंड : उधमसिंह नगर | ऋषिकेश | जिम कार्बेट नेशनल पार्क | देहरादून | पिथौरागढ़ | पौढ़ी गढ़वाल | बागेश्रवर | रूद्रप्रयाग | रानीखेत | गढ़वाल | कौसानी | मसूरी-धनौल्टी | ज्योलिकोट | हरिद्वार | टिहरी गढ़वाल | चंपावत | नैनीताल | औली | कौसानी | अल्मोडा | आदि कैलाश यात्रा | उत्तरकाशी | चकराता | चमोली | त्रिपुरा : धलाई | पश्चिम त्रिपुरा |

तमिलनाडु : थेनी | डिंडीगुल | ईरोड | महाबलिपुरम | चेत्तीनाद | कुडलोर | करूर | कोयंबटूर | मदुरै | नागापट्टिनम | नमक्कल | नीलगिरि | पेरंबदूर | पुदुक्कोट्टई | सलेम | शिवगंगा | तिरूचिरापल्ली | तिरुनेलवेली | तिरुवल्लूर | तिरुवरुर | तिरूवन्नमलई | ऊटी | वेल्लोर | विल्लुपुरम | तंजावुर | अन्नामलाई | कोजीकोड | कोडईकनाल | चैन्नई | कुन्नूर | कन्याकुमारी | कांचीपुरम |

हरियाणा : यमुनानगर | सोनीपत | रोहतक | सिरसा | रेवाड़ी | पानीपत | पंचकूला | मेवात | करनाल | भिवानी | फरीदाबाद | फतेहाबाद | गुडगांव | हिसार | झज्जर | जीन्द | कैथल | अम्बाला |

केरल : कोवालम | तिरुवनंतपुरम | पलक्कड | वर्कला | थेक्केडी | अलपुज्जा | कन्नूर | कसरगोड | कोल्लम | मन्नार | त्रिसूर | पथनमथिट्टा | कुमारकोम | कोट्टायम | कोजीकोड | कोच्चि |

पश्चिम बंगाल : हुगली | हावड़ा | जलपाईगुडी | पश्चिमी मेदिनीपुर | पुरूलिया | उत्तर दिनाजपुर | उत्तर 24 परगना | वीरभूम | वर्द्धमान | दार्जिलिंग | कलिंगपोंग | कोलकता |

आंध्र प्रदेश : गुंटूर | नैल्‍लोर | वारंगल | निजामाबाद | हैदराबाद | नालगौंडा | तिरुपति | करीमनगर | कुर्नूल | अनंतपुर | आदिलाबाद | पुडुचेरी : यनम | माहे | कराईकल |

असम : काजीरंगा | गुवाहाटी | गोलपाड़ा | बारपेटा | जोरहट | कचार | शिवसागर | सोनितपुर | धुबरि | गोलाघाट | सिक्किम : पूर्वी सिक्किम | प.सिक्किम | गंगटोक | द.सिक्किम |

छत्तीसगढ़ : दुर्ग | दांतेवाड़ा | धमतरी | जंजगीर-चम्पा | जशपुर | कवर्धा | कोरबा | महासमुन्द | रायपुर | राजनंदगांव | बस्तर | मेघालय : शिलांग | पश्चिमी गारो | प. खासी हिल्स |
नागालैंड : जुन्हेबोतो | मोन | दीमापुर | फेक | तुएनसांग | वोखा | मणिपुर : विष्णुपुर | चूराचांदपुर | प.इम्फाल | पूर्वी इम्फाल | सेनापति | तमेंगलोंग | थाउबल | उखरूल | चंदेल |
अरूणाचल प्रदेश : पूर्वी कमेंग | निचला सुबांसिरी | निचली दिबांग घाटी | पश्‍िचमी सियांग | पूर्वी सियांग | तीराप | त्वांग | पापुम पेर | नामदफा | चांगलांग |

गुजरात : दाहोद | डांग | दांता | गांधीनगर | पंचमहल | पोरबंदर | राजकोट | साबरकांथा | सापूतारा | सूरत | सुरेन्द्रनगर | कच्छ - भुज | इडर | पाटन | भावनगर | भरूच | अहमदाबाद |

झारखंड : पलामू | पश्चिमी सिंहभूम | पूर्वी सिंहभूम | रांची | साहेबगंज | मैथन डैम | नेतरहाट | पाकुड़ | कोडरमा | लातेहार | लोहरदग्‍गा | बोकारो | चतरा | धनबाद | दुमका | गिरिडीह | गोड्डा | गुमला | हजारीबाग | जमशेदपुर | जामताड़ा | गढ़वा | बेतला नेशनल पार्क | देवघर | सिमडेगा |

राजस्थान : बारां | करौली | सिरोही | धौलपुर | शेखावटी | सीकर | दौसा | हनुमानगढ़ | श्रीगंगानगर | टोंक | चुरू | जालौर | बंसवाड़ा | बाड़मेर | भरतपुर | भिलवाड़ा | झुंझनू | डूंगरपुर | पाली | सवाई माधोपुर | जयपुर | रणथंभौर | माउंट आबू | जोधपुर | जैसलमेर | बीकानेर | सरिस्का - अलवर | करौली | उदयपुर | अजमेर | झालावाड़ | रणकपुर |

पंजाब : रूपनगर | चंडीगढ़ | फरीदकोट | फिरोजपुर | गुरदासपुर | होशियारपुर | नवांशहर | संगरूर | कपूरथला | जालंधर | पटियाला | फतेहगढ़ साहिब | भटिंडा | लुधियाना | अमृतसर |
(गोवा की सैर)